भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि बहुत सारे लोगों के लिए यह दिल से जुड़ी हुई चीज है। जब भी कोई बड़ा मैच होता है, तो हम सब खिलाड़ी, चौके-छक्के और विकेट पर ध्यान देते हैं, लेकिन उसी मैदान पर एक ऐसा इंसान भी होता है जिस पर पूरा मैच टिका रहता है, और वह होता है क्रिकेट अंपायर। कई बार एक छोटा सा फैसला पूरे मैच का माहौल बदल देता है। इसी वजह से अंपायर की जिम्मेदारी बहुत ज्यादा होती है और गलती की गुंजाइश लगभग नहीं के बराबर होती है।

आजकल बहुत से युवा क्रिकेट से जुड़ा करियर बनाना चाहते हैं, लेकिन सभी खिलाड़ी नहीं बन पाते। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या क्रिकेट अंपायर बनना भी एक अच्छा करियर हो सकता है। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्रिकेट अंपायर कैसे बनते हैं और इसके लिए पढ़ाई-लिखाई या योग्यता क्या चाहिए। इसी उलझन को दूर करने के लिए इस लेख में क्रिकेट अंपायर बनने से जुड़ी सारी जरूरी बातें आसान और साधारण भाषा में समझाई जा रही हैं।
इस लेख में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्रिकेट अंपायर बनने की पूरी प्रक्रिया क्या होती है, इसमें ट्रेनिंग कैसे मिलती है, परीक्षा कैसी होती है, आगे चलकर करियर में क्या ग्रोथ हो सकती है और एक आम इंसान इस फील्ड में कैसे आगे बढ़ सकता है।
क्रिकेट अंपायर कौन होता है?
क्रिकेट अंपायर वह व्यक्ति होता है जो मैदान पर मौजूद रहकर खेल को नियमों के अनुसार चलाता है। अंपायर का काम सिर्फ आउट या नॉट आउट कहना ही नहीं होता, बल्कि मैच को सही तरीके से और बिना किसी पक्षपात के पूरा कराना भी उसकी जिम्मेदारी होती है। वह यह देखता है कि खिलाड़ी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं और खेल सही दिशा में चल रहा है या नहीं। आसान शब्दों में कहें तो अंपायर मैदान पर नियमों का रखवाला होता है।
क्रिकेट अंपायर की मुख्य जिम्मेदारियाँ
क्रिकेट अंपायर को मैच के दौरान कई तरह के फैसले लेने होते हैं। जैसे जब कोई खिलाड़ी LBW की अपील करता है, कैच लिया गया है या नहीं, या रन आउट हुआ है या नहीं, इन सभी पर अंतिम फैसला अंपायर का ही होता है। इसके अलावा अंपायर नो-बॉल और वाइड बॉल का भी फैसला करता है, जो कई बार मैच का रुख बदल देता है। अंपायर खिलाड़ियों के व्यवहार पर भी नजर रखता है ताकि कोई अनुशासनहीनता न हो। साथ ही वह पूरे खेल को नियमों के अनुसार चलवाता है और मैच खत्म होने के बाद उसकी रिपोर्ट भी तैयार करता है, जो आगे के रिकॉर्ड के लिए जरूरी होती है।
क्रिकेट अंपायर के प्रकार:
क्रिकेट में अंपायरिंग को अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है, ताकि व्यक्ति अनुभव के साथ आगे बढ़ सके और धीरे-धीरे बड़े मैचों तक पहुंच सके। क्रिकेट अंपायर के प्रकार निम्न हैं:
लोकल / क्लब अंपायर:
लोकल या क्लब अंपायरिंग की शुरुआत स्कूल, कॉलेज और छोटे-छोटे स्थानीय टूर्नामेंट से होती है। ज्यादातर लोग अंपायरिंग की पहली सीढ़ी यहीं से चढ़ते हैं। यहां अनुभव तो ज्यादा बड़ा नहीं होता, लेकिन नियमों की समझ और मैदान पर फैसले लेने का आत्मविश्वास यहीं से बनता है।
स्टेट लेवल अंपायर:
जब कोई अंपायर लोकल लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसे राज्य स्तरीय मैचों में मौका मिल सकता है। स्टेट लेवल अंपायरों की नियुक्ति राज्य क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा की जाती है। यहां मैच ज्यादा गंभीर होते हैं और जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
नेशनल लेवल अंपायर:
नेशनल लेवल पर वही अंपायर पहुंच पाते हैं जिनका अनुभव और रिकॉर्ड अच्छा होता है। इस स्तर पर रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में अंपायरिंग करने का मौका मिलता है। यहां फैसलों की अहमियत बहुत ज्यादा होती है और दबाव भी काफी रहता है।
इंटरनेशनल अंपायर:
इंटरनेशनल अंपायर क्रिकेट अंपायरिंग का सबसे ऊंचा स्तर होता है। ऐसे अंपायरों को ICC की मान्यता मिलती है। ये लोग टेस्ट मैच, वनडे और टी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अंपायरिंग करते हैं। यहां पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन मेहनत और धैर्य से यह सपना भी पूरा हो सकता है।
क्रिकेट अंपायर बनने की योग्यता (Eligibility)
क्रिकेट अंपायर बनने के लिए कुछ बुनियादी योग्यताओं का होना जरूरी होता है। सबसे पहले बात करें पढ़ाई की, तो आमतौर पर उम्मीदवार का कम से कम 12वीं पास होना जरूरी माना जाता है। हालांकि कुछ राज्यों में ग्रेजुएशन किए हुए लोगों को थोड़ा ज्यादा महत्व दिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि बिना ग्रेजुएशन अंपायर नहीं बन सकते। पढ़ाई से ज्यादा जरूरी होता है क्रिकेट की समझ और नियमों का ज्ञान।
उम्र की बात करें तो अधिकतर क्रिकेट बोर्ड 18 से 35 साल की उम्र के बीच आवेदन स्वीकार करते हैं। हालांकि कुछ राज्य क्रिकेट एसोसिएशन ऐसे भी हैं जो 40 साल तक के उम्मीदवारों को मौका दे देते हैं। यह पूरी तरह उस राज्य के नियमों पर निर्भर करता है, इसलिए आवेदन से पहले जानकारी लेना जरूरी होता है।
क्रिकेट अंपायर के लिए क्रिकेट के नियमों का अच्छा ज्ञान होना सबसे जरूरी योग्यता मानी जाती है। MCC Laws of Cricket को अच्छे से समझना पड़ता है और समय-समय पर जो बदलाव होते हैं, उनकी जानकारी भी रखनी होती है। अगर नियमों में अपडेट आया और अंपायर को पता ही नहीं, तो मैदान पर दिक्कत हो सकती है।
इसके साथ-साथ शारीरिक और मानसिक फिटनेस भी बहुत जरूरी होती है। मैच के दौरान अंपायर को कई घंटों तक मैदान में खड़े रहना पड़ता है, धूप हो या हल्की बारिश, हर हालत में फोकस बनाए रखना होता है। साथ ही फैसले जल्दी लेने होते हैं, इसलिए दिमाग का तेज होना और दबाव में शांत रहना बहुत जरूरी गुण है।
सबसे अहम बात यह है कि अंपायर को निष्पक्ष और ईमानदार होना चाहिए। अंपायर का फैसला ही अंतिम माना जाता है, इसलिए उसमें किसी तरह का पक्षपात नहीं होना चाहिए। यही एक ऐसा गुण है जो एक अच्छे अंपायर की पहचान बनाता है।
क्रिकेट अंपायर बनने की प्रक्रिया:
Step 1: क्रिकेट नियमों का गहराई से अध्ययन:
क्रिकेट अंपायर बनने का पहला कदम है क्रिकेट के नियमों को अच्छे से पढ़ना और समझना। MCC द्वारा बनाए गए Laws of Cricket को बार-बार पढ़ना पड़ता है। शुरुआत में नियम थोड़े मुश्किल लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे समझ आने लगते हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ये नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए अपडेट रहना बहुत जरूरी होता है।
Step 2: राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में आवेदन:
भारत में सीधे BCCI में जाकर अंपायर बनने का आवेदन नहीं किया जा सकता। इसके लिए पहले अपने राज्य की क्रिकेट एसोसिएशन के जरिए आवेदन करना होता है। हर राज्य की अपनी क्रिकेट एसोसिएशन होती है, जैसे दिल्ली के लिए DDCA, मुंबई के लिए MCA और उत्तर प्रदेश के लिए UPCA। इन्हीं संस्थाओं के माध्यम से अंपायरिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
Step 3: अंपायरिंग कोर्स जॉइन करना:
राज्य क्रिकेट बोर्ड समय-समय पर अंपायरिंग कोर्स आयोजित करते हैं। जब आवेदन स्वीकार हो जाता है, तो उम्मीदवार को इस कोर्स में शामिल होना पड़ता है। इस कोर्स में क्रिकेट के नियमों को विस्तार से समझाया जाता है। साथ ही मैदान पर प्रैक्टिस कराई जाती है, जैसे सही जगह खड़े होना, सिग्नल कैसे देना है और मैच को कैसे मैनेज करना है। यह कोर्स नए लोगों के लिए बहुत मददगार होता है।
Step 4: लिखित और प्रैक्टिकल परीक्षा:
कोर्स पूरा होने के बाद उम्मीदवार की परीक्षा ली जाती है। इसमें लिखित परीक्षा होती है, जिसमें क्रिकेट के नियमों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं और कुछ केस स्टडी वाले प्रश्न भी होते हैं। इसके अलावा प्रैक्टिकल टेस्ट भी होता है, जिसमें मैदान पर वास्तविक जैसी परिस्थितियाँ बनाई जाती हैं। इसमें देखा जाता है कि उम्मीदवार सही पोजिशन ले पा रहा है या नहीं और फैसला सही दे पा रहा है या नहीं।
Step 5: लोकल मैचों से शुरुआत:
जो उम्मीदवार परीक्षा में सफल हो जाते हैं, उन्हें शुरुआत में लोकल या जिला स्तर के मैच दिए जाते हैं। इसमें जूनियर टूर्नामेंट या छोटे स्तर के मुकाबले शामिल होते हैं। यहीं से असली अनुभव बनता है। धीरे-धीरे मैदान का दबाव समझ में आता है और फैसले लेने में आत्मविश्वास बढ़ता है।
Step 6: प्रमोशन और उच्च स्तर:
जब अंपायर लोकल मैचों में अच्छा प्रदर्शन करता है और अनुभव बढ़ता है, तो उसे आगे प्रमोशन मिलता है। पहले स्टेट लेवल, फिर नेशनल लेवल और उसके बाद इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचने का रास्ता खुलता है। यह पूरा सफर अनुभव और प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
ICC इंटरनेशनल अंपायर कैसे बनते हैं?
इंटरनेशनल अंपायर बनना आसान नहीं होता। इसके लिए कई सालों तक घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है। BCCI की सिफारिश भी बहुत जरूरी होती है। इसके बाद ICC द्वारा ट्रेनिंग और मूल्यांकन किया जाता है। कई बार इंटरनेशनल अंपायर बनने में 10 से 15 साल तक का समय लग जाता है। यह एक लंबा सफर है, लेकिन अगर धैर्य और मेहनत हो तो मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।
क्रिकेट अंपायर की सैलरी (Indicative Information)
क्रिकेट अंपायर की सैलरी कोई फिक्स नहीं होती, बल्कि यह मैच के स्तर और क्रिकेट बोर्ड पर निर्भर करती है। यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है और समय के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। शुरुआत में लोकल मैचों में अंपायरिंग करने पर करीब ₹1,000 से ₹3,000 प्रति मैच मिल जाते हैं। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है और स्टेट लेवल पर पहुंचते हैं, तो ₹5,000 से ₹15,000 तक की फीस मिलने लगती है। घरेलू टूर्नामेंट में अंपायरिंग करने वाले अंपायरों को लगभग ₹20,000 से ₹40,000 प्रति मैच तक मिल सकता है। वहीं इंटरनेशनल मैचों में अंपायरिंग करने पर ₹1 लाख या उससे ज्यादा प्रति मैच भी मिल सकता है, जो अनुभव और मैच के प्रकार पर निर्भर करता है।
क्रिकेट अंपायर बनने के फायदे
क्रिकेट अंपायर बनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप क्रिकेट से जुड़े रहते हैं, भले ही आप खिलाड़ी न बन पाए हों। मैदान पर रहकर मैच को करीब से देखने और उसका हिस्सा बनने का अलग ही अनुभव होता है। अंपायर को समाज में सम्मान और पहचान भी मिलती है, खासकर जब वह बड़े स्तर के मैचों में अंपायरिंग करता है। इसके अलावा अलग-अलग शहरों और देशों में यात्रा करने का मौका मिलता है, जिससे अनुभव भी बढ़ता है। सबसे अच्छी बात यह है कि अंपायर क्रिकेट के खेल को सही और निष्पक्ष तरीके से चलाने में अपना योगदान देता है, जो अपने आप में गर्व की बात होती है।
क्रिकेट अंपायर बनने की चुनौतियाँ
जहां फायदे हैं, वहीं अंपायरिंग में कुछ चुनौतियाँ भी होती हैं। मैदान पर हर फैसले का दबाव बहुत ज्यादा होता है, क्योंकि एक गलत निर्णय पर खिलाड़ी, दर्शक और मीडिया सभी आलोचना कर सकते हैं। कई बार अंपायर को आलोचना और गुस्से का भी सामना करना पड़ता है। मैच के दौरान लंबे समय तक खड़े रहना शारीरिक रूप से थका देने वाला हो सकता है। इसके अलावा क्रिकेट के नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए अंपायर को हमेशा अपडेट रहना पड़ता है, जो थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है।
क्या खिलाड़ी अंपायर बन सकते हैं?
हाँ, कई ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी हैं जो रिटायरमेंट के बाद अंपायरिंग को अपना करियर बनाते हैं। चूंकि उन्हें पहले से ही खेल की अच्छी समझ होती है, इसलिए उनके लिए नियमों को समझना और मैदान पर फैसले लेना थोड़ा आसान हो जाता है। हालांकि पूर्व खिलाड़ी होना जरूरी नहीं है, लेकिन इससे फायदा जरूर मिलता है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल):
क्या बिना क्रिकेट खेले अंपायर बन सकते हैं?
हाँ, बिना क्रिकेट खेले भी अंपायर बना जा सकता है, लेकिन इसके लिए क्रिकेट के नियमों की गहरी समझ और लगातार अभ्यास जरूरी होता है।
क्या अंपायर बनने के लिए फिटनेस टेस्ट होता है?
हाँ, जैसे-जैसे स्तर बढ़ता है, खासकर स्टेट और नेशनल लेवल पर, फिटनेस टेस्ट देना जरूरी हो जाता है ताकि अंपायर लंबे मैचों को संभाल सके।
क्या महिलाएँ क्रिकेट अंपायर बन सकती हैं?
बिल्कुल, आज के समय में कई महिला अंपायर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग कर रही हैं और यह फील्ड महिलाओं के लिए भी खुली हुई है।
अंपायर बनने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर 5 से 10 साल के अंदर एक अंपायर स्टेट लेवल तक पहुंच सकता है, लेकिन यह पूरी तरह मेहनत, सीखने और प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष:
क्रिकेट अंपायर बनना उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो क्रिकेट से जुड़े रहना चाहते हैं लेकिन किसी वजह से खिलाड़ी नहीं बन पाए। यह करियर धैर्य, ईमानदारी और लगातार सीखने की आदत की मांग करता है। अगर आपको क्रिकेट से सच्चा लगाव है, नियमों को समझने में रुचि है और आप निष्पक्ष फैसले लेने की क्षमता रखते हैं, तो क्रिकेट अंपायरिंग आपके लिए एक सम्मानजनक और संतोष देने वाला रास्ता बन सकता है।

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