हार्ड स्किल्स और सॉफ़्ट स्किल्स में क्या अंतर है? जानिए कौन-सी स्किल्स आपके करियर के लिए ज्यादा ज़रूरी हैं

difference between hard skills and soft skills

आज के समय में दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है। पहले ऐसा माना जाता था कि अगर किसी के पास अच्छी डिग्री या सर्टिफिकेट है तो उसकी नौकरी और सफलता तय है, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं रह गया है। अब लोगों को यह समझ आने लगा है कि असली पहचान किसी इंसान की उसकी डिग्री नहीं बल्कि उसका स्किल सेट होता है। यानी व्यक्ति को क्या-क्या काम करना आता है, वही सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

difference between hard skills and soft skills

अक्सर हम सुनते तो हैं कि स्किल्स बहुत ज़रूरी होती हैं, लेकिन ज़्यादातर लोगों को यह साफ़ नहीं पता होता कि हार्ड स्किल्स और सॉफ़्ट स्किल्स में असली फर्क क्या है। कई बार लोग एक को ज़्यादा अहम मान लेते हैं और दूसरे को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसी वजह से कन्फ्यूजन बना रहता है। इस लेख में इसी कन्फ्यूजन को आसान भाषा में पूरी तरह समझाने की कोशिश की गई है।

यह लेख खास तौर पर स्टूडेंट्स, नौकरी करने वाले लोग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा और बिज़नेस प्रोफेशनल्स सभी के लिए मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि स्किल्स की ज़रूरत हर फील्ड में होती है।

स्किल्स क्या होती हैं?

स्किल्स का मतलब होता है किसी व्यक्ति की वह क्षमता या काबिलियत, जिसकी मदद से वह कोई भी काम सही तरीके से कर पाता है। जैसे किसी को कंप्यूटर चलाना आता है, किसी को बात करने की अच्छी समझ होती है या कोई मशीन अच्छे से चला लेता है। ये सभी स्किल्स के ही उदाहरण हैं। स्किल्स कोई एक दिन में नहीं आतीं, बल्कि पढ़ाई, ट्रेनिंग, अनुभव और रोज़ के अभ्यास से धीरे-धीरे बनती हैं. आमतौर पर स्किल्स को दो मुख्य कैटेगरी में रखा जाता है। पहली होती है हार्ड स्किल्स और दूसरी होती है सॉफ़्ट स्किल्स।

हार्ड स्किल्स क्या होती हैं?

हार्ड स्किल्स वे स्किल्स होती हैं जो तकनीकी और प्रैक्टिकल होती हैं। यानी जिन्हें किसी कोर्स, ट्रेनिंग या क्लास के ज़रिए सीखा जा सकता है। इन स्किल्स को चेक भी किया जा सकता है कि व्यक्ति को यह काम आता है या नहीं।

हार्ड स्किल्स की खास बातें यह होती हैं कि ये सिखाई जाती हैं और इन्हें टेस्ट या एग्जाम के ज़रिए मापा जा सकता है। ज़्यादातर हार्ड स्किल्स किसी न किसी डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट से जुड़ी होती हैं। किसी खास नौकरी या काम के लिए अलग-अलग तरह की हार्ड स्किल्स की ज़रूरत पड़ती है।

हार्ड स्किल्स के उदाहरण के तौर पर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग जैसे जावा, पाइथन या पीएचपी, डाटा एंट्री, ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग, वेब डेवलपमेंट, अकाउंटिंग, टैली या जीएसटी का ज्ञान, मशीन ऑपरेशन, टाइपिंग स्पीड, एसईओ बेसिक्स और डिजिटल मार्केटिंग टूल्स का ज्ञान शामिल किया जा सकता है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति अकाउंटेंट बनना चाहता है, तो उसके लिए अकाउंटिंग, टैक्सेशन और अलग-अलग सॉफ्टवेयर टूल्स की हार्ड स्किल्स आना बहुत ज़रूरी होता है। इनके बिना वह उस जॉब में काम ही नहीं कर पाएगा।

सॉफ़्ट स्किल्स क्या होती हैं?

सॉफ़्ट स्किल्स किसी व्यक्ति के स्वभाव, सोच और दूसरों के साथ व्यवहार करने के तरीके से जुड़ी होती हैं। ये स्किल्स यह दिखाती हैं कि कोई इंसान अपने ज्ञान और हार्ड स्किल्स का इस्तेमाल कितनी समझदारी से करता है।

सॉफ़्ट स्किल्स को किसी किताब से सीधे-सीधे नहीं सीखा जा सकता। ये समय, अनुभव और लोगों के साथ उठने-बैठने से अपने आप विकसित होती हैं। इन्हें किसी एग्जाम से मापा नहीं जा सकता, लेकिन हर जगह इनकी ज़रूरत पड़ती है, चाहे नौकरी हो या बिज़नेस।

सॉफ़्ट स्किल्स की कुछ आम मिसालें हैं – कम्यूनिकेशन स्किल्स, टीमवर्क, लीडरशिप, टाइम मैनेजमेंट, प्रॉब्लम सॉल्विंग, डिसीजन मेकिंग, इमोशनल इंटेलिजेंस, पॉज़िटिव एटीट्यूड, एडैप्टेबिलिटी और वर्क एथिक्स।

अगर किसी व्यक्ति को बहुत अच्छी कोडिंग आती है, लेकिन वह टीम के साथ बात नहीं कर पाता या दूसरों को समझ नहीं पाता, तो आगे चलकर उसे परेशानी होती है। ऐसे में उसकी सफलता सीमित रह जाती है। यही वजह है कि सॉफ़्ट स्किल्स को भी उतना ही ज़रूरी माना जाता है जितना हार्ड स्किल्स को।

हार्ड स्किल्स और सॉफ़्ट स्किल्स में मुख्य अंतर:

आधारहार्ड स्किल्ससॉफ़्ट स्किल्स
प्रकृतितकनीकी और व्यावहारिक होती हैंव्यवहारिक और मानसिक होती हैं
सीखने का तरीकाकोर्स, ट्रेनिंग और पढ़ाई सेअनुभव, अभ्यास और जीवन से
मापसंभव होता है जैसे टेस्ट और एग्जामसीधे तौर पर मापना संभव नहीं
प्रमाणसर्टिफिकेट या डिग्री मिलती हैकोई आधिकारिक प्रमाण नहीं होता
नौकरी में उपयोगकाम करने के लिए जरूरीकाम को बेहतर तरीके से करने के लिए जरूरी

नौकरी में कौन-सी स्किल्स ज्यादा जरूरी हैं?

यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि सिर्फ़ हार्ड स्किल्स या सिर्फ़ सॉफ़्ट स्किल्स ही काफी हैं। आज के दौर में अगर किसी को नौकरी में टिके रहना है और आगे बढ़ना है तो दोनों का संतुलन होना बहुत ज़रूरी है। केवल एक तरह की स्किल्स पर निर्भर रहना लंबे समय तक फायदा नहीं देता।

एंट्री लेवल जॉब के लिए:

जब कोई व्यक्ति नई-नई नौकरी शुरू करता है, तब हार्ड स्किल्स ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं। कंपनी सबसे पहले यही देखती है कि सामने वाला व्यक्ति काम करने लायक है या नहीं। उसे मशीन चलानी आती है, सॉफ्टवेयर समझ में आता है या दिए गए टास्क पूरे कर सकता है या नहीं। इसलिए शुरुआत में हार्ड स्किल्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

ग्रोथ और प्रोमोशन के लिए:

जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, वैसे-वैसे सॉफ़्ट स्किल्स की अहमियत बढ़ जाती है। प्रमोशन या ग्रोथ के समय सिर्फ़ काम आना ही काफी नहीं होता, बल्कि लीडरशिप, कम्यूनिकेशन स्किल्स और डिसीजन मेकिंग जैसी बातें आगे बढ़ने में मदद करती हैं। जो व्यक्ति टीम को संभाल सकता है और सही फैसले ले सकता है, वही आगे जाता है।

छात्रों के लिए हार्ड और सॉफ़्ट स्किल्स क्यों जरूरी हैं?

आज के समय में छात्रों के लिए सिर्फ़ किताबें पढ़कर परीक्षा पास कर लेना काफी नहीं है। अब कंपटीशन बहुत बढ़ गया है और हर जगह स्किल्स देखी जाती हैं। छात्रों को यह समझना होगा कि हार्ड स्किल्स उन्हें रोज़गार पाने में मदद करती हैं, जबकि सॉफ़्ट स्किल्स उन्हें अपने कैरियर में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं। कई बार ऐसा होता है कि छात्र पढ़ाई में अच्छे होते हैं, लेकिन आत्मविश्वास की कमी या बात ठीक से न कर पाने के कारण इंटरव्यू में पिछड़ जाते हैं।

बिज़नेस और उद्यमिता में स्किल्स की भूमिका

बिज़नेस में सिर्फ़ तकनीकी जानकारी होना ही काफी नहीं होता। यहां दोनों तरह की स्किल्स की जरूरत पड़ती है। हार्ड स्किल्स में अकाउंटिंग, मार्केटिंग टूल्स का इस्तेमाल और प्रोडक्ट नॉलेज जैसी बातें आती हैं, जिनसे बिज़नेस की नींव मजबूत होती है। वहीं सॉफ़्ट स्किल्स में कस्टमर हैंडलिंग, नेगोशिएशन, लीडरशिप और रिस्क टेकिंग जैसी चीजें शामिल होती हैं। एक सफल बिज़नेस वही माना जाता है जहां मालिक हार्ड स्किल्स और सॉफ़्ट स्किल्स दोनों को बैलेंस करके चलाता है।

क्या सॉफ़्ट स्किल्स सीखी जा सकती हैं?

यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं कि क्या सॉफ़्ट स्किल्स सीखी जा सकती हैं या ये जन्म से ही होती हैं। इसका जवाब है हाँ, लेकिन इसमें समय लगता है। सॉफ़्ट स्किल्स किताबों से कम और अनुभव से ज्यादा आती हैं। इंसान जैसे-जैसे लोगों के साथ काम करता है और हालातों का सामना करता है, वैसे-वैसे ये स्किल्स अपने आप बेहतर होती जाती हैं।

सॉफ़्ट स्किल्स सुधारने के तरीके

सॉफ़्ट स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले लोगों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए। समय-समय पर दूसरों से फीडबैक लेना भी बहुत फायदेमंद होता है। खुद का आत्मविश्लेषण करना, नई परिस्थितियों में खुद को ढालने की कोशिश करना और टीमवर्क का अभ्यास करना सॉफ़्ट स्किल्स को धीरे-धीरे मजबूत बना देता है।

भविष्य में कौन-सी स्किल्स ज्यादा महत्वपूर्ण होंगी?

आने वाला समय पहले से काफी अलग होने वाला है। अब धीरे-धीरे ऑटोमेशन और एआई का इस्तेमाल हर फील्ड में बढ़ता जा रहा है। बहुत से ऐसे तकनीकी काम हैं जो पहले इंसान करता था, लेकिन आगे चलकर वही काम मशीनें और सॉफ्टवेयर करने लगेंगे। ऐसे में सिर्फ़ हार्ड स्किल्स होना ही काफी नहीं रहेगा। भविष्य में कम्यूनिकेशन, क्रिएटिविटी, इमोशनल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी सॉफ़्ट स्किल्स की मांग और ज्यादा बढ़ने वाली है। जो इंसान नए आइडिया सोच सकता है, भावनाओं को समझ सकता है और सही समय पर सही फैसला ले सकता है, वही आगे टिक पाएगा।

इसलिए आने वाले समय में वही व्यक्ति सबसे ज्यादा सफल माना जाएगा, जिसके पास हार्ड स्किल्स के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग सॉफ़्ट स्किल्स भी होंगी। दोनों का कॉम्बिनेशन ही भविष्य की असली ताकत बनेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

क्या बिना सॉफ़्ट स्किल्स के नौकरी मिल सकती है?

शुरुआत में नौकरी मिल जाना मुमकिन है, खासकर अगर किसी के पास अच्छी हार्ड स्किल्स हों। लेकिन लंबे समय तक उसी नौकरी में टिके रहना या आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि सॉफ़्ट स्किल्स की कमी रास्ता रोक देती है।

क्या हार्ड स्किल्स ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?

नौकरी पाने के लिए हार्ड स्किल्स बहुत जरूरी होती हैं, क्योंकि इन्हीं से यह साबित होता है कि व्यक्ति काम कर सकता है। लेकिन जब आगे बढ़ने, प्रमोशन या लीडर बनने की बात आती है, तब सॉफ़्ट स्किल्स अनिवार्य हो जाती हैं।

क्या सॉफ़्ट स्किल्स का कोई सर्टिफिकेट होता है?

नहीं, सॉफ़्ट स्किल्स का कोई तय सर्टिफिकेट नहीं होता। ये इंसान के व्यवहार, सोच और काम करने के तरीके से पहचानी जाती हैं, न कि किसी कागज़ से।

छात्रों को सबसे पहले कौन-सी स्किल्स पर ध्यान देना चाहिए?

छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कम्यूनिकेशन स्किल्स और टाइम मैनेजमेंट पर खास ध्यान देना चाहिए। ये स्किल्स आगे चलकर पढ़ाई और करियर दोनों में बहुत काम आती हैं।

क्या दोनों स्किल्स एक साथ सीखी जा सकती हैं?

हाँ, दोनों स्किल्स को एक साथ सीखा और विकसित किया जा सकता है। बल्कि आज के समय में ऐसा करना और भी जरूरी हो गया है।

निष्कर्ष

हार्ड स्किल्स और सॉफ़्ट स्किल्स दोनों ही जीवन और करियर के दो मजबूत स्तंभ मानी जाती हैं। अगर इनमें से एक भी कमजोर हो, तो सफलता अधूरी रह जाती है। हार्ड स्किल्स आपको मौके तक पहुंचाती हैं, जबकि सॉफ़्ट स्किल्स उस मौके को लंबे समय तक बनाए रखती हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि हम दोनों तरह की स्किल्स पर बराबर मेहनत करें और खुद को हर स्थिति के लिए तैयार रखें।

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