दोस्तो, टीवी में आजकल क्राइम शो जैसे “CID” देखते हुए या न्यूज़ में किसी बड़े केस की बात सुनते हुए आपने “फॉरेंसिक रिपोर्ट”, “DNA मैच” और “फिंगरप्रिंट एनालिसिस” जैसे शब्द ज़रूर सुनें होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं ये सब होता क्या है और साइंस का कौन सा फ़ील्ड इसमें शामिल रहता है। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि ये सब चीजें एक ही फील्ड से आती हैं, जिसे “फॉरेंसिक साइंस” कहते हैं।

कई स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स अक्सर जानना चाहते हैं कि “फॉरेंसिक साइंस पढ़कर क्या बन सकते हैं? क्या ये सिर्फ CID और क्राइम पैट्रोल जैसे टीवी शो की तरह का काम है? इसकी पढ़ाई कितनी मुश्किल है? और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न ये रहता है कि – क्या इसमें अच्छी जॉब मिलती है?” तो आपके सभी प्रश्नों का जवाब इस लेख में मिल जाएगा। आज के इस लेख में हम फॉरेंसिक साइंस को बिल्कुल शुरुआत से लेकर करियर तक सब कुछ सरल और विस्तार से समझेंगे।
फॉरेंसिक साइंस क्या है?
फॉरेंसिक साइंस (Forensic Science) का मतलब है – विज्ञान की मदद से अपराध की जांच करना। इस फ़ील्ड को आप एक ऐसा ब्रिज मान सकते हैं, जो साइंस (विज्ञान) और लॉ (कानून) को जोड़ता है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट अपराध स्थल से इकट्ठा किए गए सबूतों (जैसे खून, बाल, कपड़े, हथियार, फिंगरप्रिंट, डिजिटल डेटा इत्यादि) का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करते हैं ताकि कोर्ट में सच सामने आ सके।
सरल शब्दों में ये कह सकते हैं कि “अपराध स्थल पर जो भी निशान मिलते हैं, उन्हें विज्ञान की मदद से पढ़कर/समझकर अपराधी तक पहुंचना – यही फॉरेंसिक साइंस है।”
फॉरेंसिक साइंस में कितने प्रकार के काम होते हैं?
अक्सर लोगों के मन में प्रश्न उठता है कि आख़िर फॉरेंसिक साइंस कौन-कौन से काम किए जाते हैं। तो मैं आपको बता दूँ कि इसमें 20 से ज्यादा स्पेशलाइजेशन हैं। उनमें से कुछ सबसे लोकप्रिय स्पेशलाइजेशन निम्न हैं:
- फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट: ये अक्सर उंगलियों के निशान से पहचान करने का काम करते है।
- DNA एनालिस्ट: खून, बाल, लार से DNA मैचिंग का काम इसमें शामिल होता है।
- बैलिस्टिक्स एक्सपर्ट: गोली, हथियार और फायरिंग की जांच के लिए यह एक समर्पित स्पेशलाइजेशन है।
- डॉक्यूमेंट एक्सामिनर: आपने कई बार न्यूज़ में सुना होगा फर्जी डॉक्युमेंट्स बना कर कुछ अवैध काम किया गया है। तो ऐसे केस में ये मदद करते हैं। इनका काम फर्जी सिग्नेचर, हैंडराइटिंग, नोट्स की जांच करना होता है।
- टॉक्सिकोलॉजी: जहर, ड्रग्स, अल्कोहल की जांच में इस विभाग के लोग एक्स्पर्ट होते हैं।
- फॉरेंसिक साइकोलॉजी: अपराधी के दिमाग और व्यवहार का अध्ययन इस फ़ील्ड में किया जाता है।
- डिजिटल फॉरेंसिक: आज के समय में अपराधी सबसे ज़्यादा इन्ही डिजिटल सबूत की वजह से पकड़े जाते हैं। जिसमें उनके मोबाइल, कंप्यूटर, CCTV, सोशल मीडिया डेटा को इस स्पेशलाइजेशन वाले एक्स्पर्ट जाँच करते हैं।
- क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन: अपराध स्थल का पूरा फोटो, स्केच, सबूत कलेक्शन का काम इनका होता है।
- फॉरेंसिक ऑडियोलॉजी: वॉइस, ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच के लिए ये एक समर्पित स्पेशलाइजेशन होता है।
- फॉरेंसिक एंट्रोपोलॉजी: हड्डियों से उम्र, लिंग, पहचान करने का काम इस विभाग के लोग करते हैं।
इनके अलावा फॉरेंसिक साइंस में कई और भी स्पेशलाइजेशन शामिल होते हैं। आगे हम इसके सिलेबस की जानकारी प्राप्त करेंगे:
फॉरेंसिक साइंस के कोर्स
फॉरेंसिक साइंस को अगर आप एक ही कोर्स मान रहे हैं तो आप पूरी तरह से ग़लत है, असल में इसमें अलग-अलग लेवल के कोर्स होते हैं। यहां कुछ मुख्य कोर्स और उनके सिलेबस की जानकारी दी गई:
1. BSc Forensic Science
यह 3 साल का कोर्स होता है। पहले साल में बेसिक साइंस (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी), के साथ क्रिमिनोलॉजी का परिचय, अपराध के प्रकार, और कानूनी सिस्टम जैसी तमाम तरह कि जानकारी प्रदान की जाती है। दूसरे साल में फिंगरप्रिंट साइंस, क्वेश्चन डॉक्यूमेंट एग्जामिनेशन, फॉरेंसिक फोटोग्राफी, क्राइम सीन मैनेजमेंट, और बेसिक DNA जैसे विषयों को पढ़ाया जाता है। जबकि तीसरे यानी अंतिम वर्ष में फॉरेंसिक केमिस्ट्री, टॉक्सिकोलॉजी, बैलिस्टिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक, फॉरेंसिक साइकोलॉजी, इंटर्नशिप/प्रोजेक्ट सब कुछ शामिल करके कैंडिडेट को फ़ील्ड में काम करने के लिए तैयार किया जाता है।
2. MSc Forensic Science
यह 2 साल का कोर्स होता है, जिसे BSc Forensic Science करने के बाद ही किया जा सकता है। इसमें असल में स्पेशलाइजेशन कराया जाता है। इस कोर्स में मुख्य रूप से एडवांस्ड DNA एनालिसिस, फॉरेंसिक बायोटेक्नोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, काउंटरफिट करेंसी, फॉरेंसिक ऑडियोलॉजी, रिसर्च मेथडोलॉजी के बारे में पढ़ाया जाता है साथ में इस कोर्स को करने वाले कैंडिडेट को थेसिस/रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करना ज़रूरी होता है।
इन दो कोर्सेस के अलावा भी फॉरेंसिक साइंस से जुड़े कुछ अन्य स्पेशलाइज्ड कोर्स भी होते हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।
3. अन्य स्पेशलाइज्ड कोर्स
कुछ अन्य स्पेशलाइज्ड कोर्स में ये शामिल हैं:
- PG Diploma in Forensic Science & Criminology
- Certificate in Cyber Forensics
- M.Tech in Forensic Science (कुछ यूनिवर्सिटी में)
भारत में फॉरेंसिक साइंस के टॉप कॉलेज
भारत में फॉरेंसिक साइंस के बारे में बहुत ही कम Universities Courses Offer करती हैं, उनमें से कुछ Top के कॉलेज और Universities की लिस्ट नीचे दी गई है:
- National Forensic Sciences University (NFSU), Gandhinagar – सबसे बेस्ट
- Amity University, Noida
- Gujarat Forensic Sciences University (अब NFSU का हिस्सा)
- Lovely Professional University (LPU)
- Bundelkhand University, Jhansi
- Osmania University, Hyderabad
- Dr. Harisingh Gour University, Sagar
- Jain University, Bangalore
एडमिशन कैसे होता है?
अगर आप इस फ़ील्ड में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए ये जानना बहुत ज़रूरी है कि फॉरेंसिक साइंस से जुड़े कोर्सेज़ में एडमिशन कैसे होता है? तो चलिए जानते हैं:
- BSc: इस कोर्स में एडमिशन के लिए सबसे ज़रूरी ये होता है कि किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं में PCB या PCM के साथ 50%+ के साथ पास होना चाहिए। इसके अलावा ध्यान देने वाली बात ये है कि कुछ यूनिवर्सिटी में मेरिट के आधार पर तो कुछ में एंट्रेंस टेस्ट (CUET, NFSU Entrance) के आधार पर एडमिशन होता है। तो एडमिशन लेने के लिए आपको अधिकारिक सोर्स से सही जानकारी प्राप्त करना ज़रूरी है।
- MSc: BSc Forensic Science या BSc में क्रिमिनोलॉजी/साइंस सब्जेक्ट्स, करने के बाद अगर आप स्पेशलाइजेशन करना चाहें तो फिर Entrance Exams जैसे NFSU Entrance, BHU PET, DUET आदि देकर अपने एडमिशन ले सकते हैं।
फॉरेंसिक साइंस में जॉब और सैलरी
फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई करने के बाद सरकारी और प्राइवेट दोनों जगह पर नौकरियाँ मिल जाती हैं, जिनमें से कुछ के बारे में नीचे की गई टेबल में बताया गया है:
| पोस्ट/जॉब | विभाग/कंपनी | अनुमानित शुरूआती सैलरी (प्रति वर्ष) | 5-10 साल बाद सैलरी (अनुमानित) |
|---|---|---|---|
| Scientific Officer (Grade A) | CFSL, FSL (सरकारी) | 7-12 लाख | 18-30 लाख+ |
| Forensic Expert (प्राइवेट) | प्राइवेट लैब, Detective Agency | 4-8 लाख | 12-25 लाख |
| Cyber Forensic Analyst | साइबर सेल, प्राइवेट सिक्योरिटी फर्म | 6-10 लाख | 20-40 लाख+ |
| Crime Scene Investigator | पुलिस विभाग, प्राइवेट | 5-9 लाख | 15-28 लाख |
| Document Examiner | बैंक, कोर्ट, प्राइवेट | 5-8 लाख | 12-22 लाख |
| Professor/Lecturer | यूनिवर्सिटी, NFSU | 8-14 लाख | 20-35 लाख+ |
खास बात – “आजकल साइबर क्राइम की वजह से डिजिटल फॉरेंसिक और साइबर फॉरेंसिक में सबसे तेज़ी से जॉब्स बढ़ रही हैं।”
इस फ़ील्ड के फायदे और चुनौतियां
फायदे:
- इस फ़ील्ड को आप रोचक (चैलेंज़िंग) और कभी बोरिंग नहीं होने वाला मान सकते हैं।
- आप समाज की सेवा (जैसे – अपराधियों को पकड़ने में मदद) करते हैं।
- सरकारी जॉब में अच्छी सिक्योरिटी और पेमेंट मिलती है।
- प्राइवेट सेक्टर में अच्छी ग्रोथ की संभावना रहती है।
चुनौतियां:
- ये फ़ील्ड बहुत ही जिम्मेदारी वाली है, एक छोटी सी गलती से केस प्रभावित हो सकता है।
- कभी-कभी अपराध स्थल पर जाना पड़ता है, तो आपको कुछ ख़राब अनुभव भी देखने के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर अपराध कुछ बड़ा हो तो फिर आपको दिल और दिमाग़ को कंट्रोल में करना सीखना होगा।
- शुरुआत में फील्ड वर्क थोड़ा मुश्किल लग सकता है लेकिन समय के साथ सब नॉर्मल लगता है।
क्या फॉरेंसिक साइंस आपके लिए सही है?
इतना सब जानने के बाद क्या आप अब फॉरेंसिक साइंस में कैरियर बनाने के बारे में गंभीर हैं? इसका जवाब नीचे दी गई कुछ बातों में छिपा हुआ है। अगर आपको ये चीजें पसंद हैं तो – हां, आप इस फ़ील्ड में ज़रूरी जाइए, जैसे कि:
- साइंस, क्राइम स्टोरी, डिटेक्टिव वर्क का काम आपको पसंद आता है।
- डिटेल में ध्यान देने की आपकी आदत है।
- लैब में काम करना आपको पसंद है।
- कानून और न्याय में इंटरेस्ट हो।
अगर ऐसी खूबियाँ आपने हैं, तो हाँ, फॉरेंसिक साइंस आपके लिए सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
क्या फॉरेंसिक साइंस में NEET की जरूरत पड़ती है?
नहीं। NEET सिर्फ मेडिकल (MBBS/BDS) के लिए है। इसमें एडमिशन अलग एंट्रेंस टेस्ट या मेरिट के आधार पर होता है।
क्या सिर्फ BSc करके जॉब मिल जाती है?
हां, मिल जाती है लेकिन MSc करके ज्यादा अच्छी पोस्ट और सैलरी मिलती है।
क्या महिलाएं इस फील्ड में काम कर सकती हैं?
बिल्कुल! आजकल फॉरेंसिक में महिलाओं की बहुत बड़ी संख्या है और वे बहुत सफल हैं।
फॉरेंसिक साइंस का सबसे अच्छा कोर्स कौन सा है?
अगर आप टॉप लेवल पर जाना चाहते हैं तो NFSU Gandhinagar से BSc/MSc करना सबसे बेस्ट माना जाता है।
क्या विदेश में भी स्कोप है?
हां, खासकर USA, UK, Australia में फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की बहुत डिमांड है।
अंत में एक छोटी सी सलाह:
फॉरेंसिक साइंस कोई आसान फील्ड नहीं है, लेकिन अगर आपमें साइंस, जिज्ञासा और मेहनत करने का जुनून है तो ये आपके लिए एक शानदार करियर बन सकता है। क्राइम को सॉल्व करने की वो खुशी, जो सिर्फ फॉरेंसिक एक्सपर्ट ही महसूस कर सकता है – वो अलग ही लेवल की होती है। हालाँकि ये आप पर डिपेंड करता है कि आप इस फ़ील्ड को कैसे समझते हैं? यह आर्टिकल सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है, इसे एक्स्पर्ट की राय नही माने। कुछ भी फ़ैसला करने से पहले संबंधित संस्थान में ज़रूर बात करें।

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