टीचर कैसे बन सकते हैं: योग्यता, पढ़ाई, ट्रेनिंग और पूरी प्रक्रिया की जानकारी

टीचर कैसे बनते हैं

शिक्षक बनना सिर्फ़ एक नौकरी करने जैसा नहीं होता, बल्कि यह समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी भी होती है। एक अच्छा टीचर केवल किताब का सिलेबस पूरा नहीं करता, बल्कि छात्रों के सोचने के तरीके को बदलता है, उनमें आत्मविश्वास भरता है और उनके भविष्य की नींव तैयार करता है। शायद इसी वजह से टीचिंग प्रोफेशन को हमेशा से सम्मान और भरोसे वाला पेशा माना गया है।

टीचर कैसे बनते हैं

आज भी बहुत सारे छात्र और युवा यह जानना चाहते हैं कि टीचर कैसे बन सकते हैं, इसके लिए कौन-सी पढ़ाई करनी होती है और क्या-क्या योग्यता चाहिए। कई बार सही जानकारी न मिलने की वजह से लोग कन्फ्यूज़ भी हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस लेख में टीचर बनने से जुड़ी बुनियादी प्रक्रिया को आसान भाषा में बताया गया है।

टीचर कौन होता है?

टीचर वह व्यक्ति होता है जो छात्रों को सिर्फ़ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ी समझ, कौशल और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी देता है। शिक्षक स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने का काम कर सकते हैं।

एक टीचर का रोल केवल बोर्ड पर लिखकर पढ़ा देने तक सीमित नहीं होता। छात्रों की जिज्ञासा को बढ़ाना, उनके सवालों को समझना, उन्हें सोचने के लिए प्रेरित करना और सही समय पर सही मार्गदर्शन देना भी शिक्षक की जिम्मेदारी होती है। कई बार एक शिक्षक की कही हुई एक बात छात्र के पूरे जीवन की दिशा बदल देती है।

टीचर के प्रकार:

टीचर के भी अलग-अलग स्तर और प्रकार होते हैं। हर स्तर पर पढ़ाने की जिम्मेदारी अलग होती है और उसी के अनुसार योग्यता व पढ़ाई भी अलग-अलग तय की जाती है।

प्राइमरी टीचर: प्राइमरी टीचर कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को पढ़ाते हैं। इस स्तर पर बच्चों की बुनियाद तैयार की जाती है, इसलिए यहां पढ़ाने वाले शिक्षक का धैर्य और समझ बहुत महत्वपूर्ण होती है।

अपर प्राइमरी या मिडिल स्कूल टीचर: ये शिक्षक कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाते हैं। इस स्टेज पर छात्र धीरे-धीरे विषयों को गहराई से समझना शुरू करते हैं, इसलिए टीचर की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

सेकेंडरी टीचर: सेकेंडरी टीचर कक्षा 9 और 10 के छात्रों को पढ़ाते हैं। यह वह समय होता है जब छात्र बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते हैं और करियर को लेकर गंभीर होने लगते हैं।

सीनियर सेकेंडरी टीचर: सीनियर सेकेंडरी टीचर कक्षा 11 और 12 के छात्रों को पढ़ाते हैं। इस स्तर पर विषयों की गहराई काफी बढ़ जाती है और छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए तैयार किया जाता है।

कॉलेज या यूनिवर्सिटी लेक्चरर: कॉलेज और यूनिवर्सिटी लेक्चरर ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन स्तर के छात्रों को पढ़ाते हैं। यहां पढ़ाई ज्यादा अकादमिक और विषय आधारित होती है और शिक्षक का रोल गाइड और मेंटर जैसा हो जाता है।

12वीं के बाद टीचर कैसे बनें?

जो छात्र स्कूल स्तर पर टीचर बनने का सपना देखते हैं, उनके लिए इसकी तैयारी 12वीं के बाद से ही शुरू हो जाती है। कई लोगों को लगता है कि टीचर बनने का रास्ता बहुत बाद में खुलता है, लेकिन असल में स्कूल टीचिंग के लिए पढ़ाई की शुरुआत काफी जल्दी हो जाती है।

अगर लक्ष्य साफ हो कि आगे चलकर बच्चों को पढ़ाना है, तो 12वीं के बाद सही कोर्स चुनना बहुत जरूरी हो जाता है। इसी चरण पर लिया गया फैसला आगे का पूरा करियर तय कर देता है।

12वीं की योग्यता

टीचर बनने की पहली और बुनियादी शर्त 12वीं पास होना है। लगभग सभी टीचिंग कोर्स में 12वीं की योग्यता मांगी जाती है। कई संस्थानों में न्यूनतम प्रतिशत की भी शर्त होती है, जो हर कॉलेज या बोर्ड के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

इसलिए 12वीं के नतीजे सिर्फ पास होने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आगे के टीचिंग कोर्स में एडमिशन के लिए भी अहम भूमिका निभाते हैं।

प्राइमरी टीचर बनने के लिए जरूरी कोर्स

जो छात्र छोटे बच्चों को पढ़ाने में रुचि रखते हैं और प्राइमरी लेवल पर टीचर बनना चाहते हैं, उनके लिए सबसे जरूरी कोर्स D.El.Ed (Diploma in Elementary Education) होता है।

इस कोर्स में यह सिखाया जाता है कि बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए, उनका मानसिक विकास कैसे समझा जाए, क्लास में पढ़ाने के कौन-कौन से तरीके अपनाए जाएं और क्लासरूम को कैसे संभाला जाए। आसान शब्दों में कहें तो यह कोर्स बच्चों और टीचर के बीच की समझ को मजबूत बनाता है।

D.El.Ed की अवधि आमतौर पर 2 साल की होती है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र सरकारी या निजी स्कूलों में प्राइमरी टीचर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

ग्रेजुएशन के बाद टीचर कैसे बनें?

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद टीचर बनने के विकल्प और भी ज्यादा खुल जाते हैं। इस स्तर पर छात्र केवल प्राइमरी ही नहीं, बल्कि मिडिल और सीनियर क्लास तक पढ़ाने के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।

बीएड (B.Ed) कोर्स

बीएड को टीचर बनने का सबसे महत्वपूर्ण और जाना-पहचाना कोर्स माना जाता है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए होता है जो कक्षा 6 से लेकर 12 तक के छात्रों को पढ़ाना चाहते हैं।

B.Ed के दौरान छात्रों को पढ़ाने की विधियां, शिक्षा मनोविज्ञान, परीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया और विषय आधारित शिक्षण की जानकारी दी जाती है। यह कोर्स आमतौर पर 2 साल का होता है।

B.Ed पूरा करने के बाद छात्र सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में टीचर बनने के योग्य हो जाते हैं।

इंटीग्रेटेड टीचिंग कोर्स

आजकल कुछ ऐसे कोर्स भी उपलब्ध हैं, जिनमें ग्रेजुएशन और टीचिंग ट्रेनिंग एक साथ कराई जाती है। इन्हें इंटीग्रेटेड टीचिंग कोर्स कहा जाता है, जैसे “BA B.Ed और BSc B.Ed”। इन कोर्स की अवधि 4 साल की होती है। इसमें छात्रों को अलग-अलग डिग्री करने की जरूरत नहीं पड़ती और पढ़ाई एक ही फ्लो में पूरी हो जाती है।

कॉलेज लेक्चरर कैसे बनते हैं? जानिए योग्यता:

जो छात्र स्कूल के बजाय कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए योग्यता थोड़ी अलग होती है। यहां पढ़ाई का स्तर ज्यादा अकादमिक होता है, इसलिए आवश्यक शर्तें भी उसी हिसाब से तय की जाती हैं।

पोस्टग्रेजुएशन की आवश्यकता

कॉलेज लेक्चरर बनने के लिए संबंधित विषय में पोस्टग्रेजुएशन यानी मास्टर डिग्री होना जरूरी होता है। बिना पोस्टग्रेजुएशन के कॉलेज स्तर पर पढ़ाने का रास्ता खुलता नहीं है।

NET या SET परीक्षा

भारत में कॉलेज या यूनिवर्सिटी में लेक्चरर बनने के लिए UGC NET या राज्य स्तर की SET परीक्षा पास करना आवश्यक होता है। यह परीक्षा छात्रों की शिक्षण क्षमता और रिसर्च से जुड़ी समझ को परखने के लिए आयोजित की जाती है।

NET या SET परीक्षा पास करने के बाद छात्र असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए योग्य माने जाते हैं और कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

टीचर बनने के लिए जरूरी परीक्षाएं:

भारत में अगर कोई छात्र सरकारी टीचर बनना चाहता है, तो सिर्फ डिग्री लेना ही काफी नहीं होता। इसके साथ कुछ पात्रता परीक्षाएं पास करना भी जरूरी होता है, जिससे यह तय किया जा सके कि शिक्षक बनने वाला व्यक्ति पढ़ाने के लिए सही रूप से तैयार है।

CTET (Central Teacher Eligibility Test): CTET एक केंद्रीय स्तर की परीक्षा होती है, जिसे पास करने के बाद उम्मीदवार केंद्र सरकार से जुड़े स्कूलों में पढ़ाने के लिए पात्र माने जाते हैं।

राज्य स्तर की TET परीक्षा: हर राज्य अपनी अलग TET परीक्षा आयोजित करता है। यह परीक्षा राज्य के सरकारी स्कूलों में टीचर बनने के लिए जरूरी होती है।

इन परीक्षाओं का उद्देश्य यही होता है कि क्लासरूम में जाने वाला शिक्षक सिर्फ डिग्रीधारी न हो, बल्कि उसमें पढ़ाने की वास्तविक क्षमता भी मौजूद हो।

सरकारी और निजी टीचर में अंतर

सरकारी टीचर बनने के लिए आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षाएं और एक तय चयन प्रक्रिया होती है। इस क्षेत्र में नौकरी की स्थिरता ज्यादा मानी जाती है और नियम स्पष्ट होते हैं।

वहीं निजी स्कूलों में टीचर की भर्ती संस्थान के अपने नियमों के अनुसार की जाती है। यहां अनुभव, पढ़ाने का तरीका और क्लास संभालने की क्षमता को ज्यादा महत्व दिया जाता है।

हालांकि रास्ता अलग-अलग हो सकता है, लेकिन दोनों ही क्षेत्रों में सम्मान भी मिलता है और सीखने के अवसर भी मौजूद होते हैं।

टीचर बनने में कितना समय लगता है

टीचर बनने में कितना समय लगेगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सा रास्ता चुना है।

  • अगर कोई छात्र 12वीं के बाद D.El.Ed करता है, तो इसमें लगभग 2 साल का समय लगता है।
  • ग्रेजुएशन के बाद B.Ed करने पर कुल मिलाकर करीब 5 से 6 साल का समय लग सकता है।
  • कॉलेज लेक्चरर बनने के लिए पोस्टग्रेजुएशन और NET जैसी परीक्षाओं के कारण समय और ज्यादा हो सकता है।

इसलिए टीचिंग को एक शॉर्टकट करियर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाला प्रोफेशन माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

टीचर बनने के लिए न्यूनतम योग्यता क्या है?

प्राइमरी टीचर बनने के लिए 12वीं पास और D.El.Ed जरूरी होता है, जबकि ऊंची कक्षाओं के लिए ग्रेजुएशन और B.Ed की आवश्यकता होती है।

क्या बिना B.Ed के टीचर बन सकते हैं?

कुछ निजी संस्थानों में अस्थायी रूप से संभव हो सकता है, लेकिन स्थायी और सरकारी टीचर बनने के लिए B.Ed जरूरी माना जाता है।

क्या टीचर बनने के लिए उम्र सीमा होती है?

सरकारी भर्तियों में उम्र सीमा तय होती है, जो राज्य और पद के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

क्या टीचिंग एक सुरक्षित करियर है?

शिक्षा की जरूरत हमेशा बनी रहती है, इसलिए टीचिंग को आमतौर पर एक स्थिर और सम्मानजनक करियर माना जाता है।

निष्कर्ष

टीचर बनना सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसके लिए सही योग्यता, उचित ट्रेनिंग और पढ़ाने के प्रति सच्ची रुचि का होना बहुत जरूरी होता है। अगर कोई छात्र सही योजना और पूरे समर्पण के साथ इस क्षेत्र में कदम रखता है, तो टीचिंग न केवल एक सुरक्षित करियर साबित हो सकती है, बल्कि आत्मसंतोष और समाज में सम्मान भी दिलाती है।

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